वर्षा दुल्हन
बैठी मेघ पालकी
हवा कहार
बूँद की आस
आयी मेघ पालकी
करे निराश
होठों का स्पर्श
वो तेरा एहसास
बढ़ाता प्यास
तेरा वो स्पर्श
डाल गया फफोले
दिल पे मेरे
तुलसी तले
क्यों जलें नहीं अब
दीप घरों में
बैठी मेघ पालकी
हवा कहार
बूँद की आस
आयी मेघ पालकी
करे निराश
होठों का स्पर्श
वो तेरा एहसास
बढ़ाता प्यास
तेरा वो स्पर्श
डाल गया फफोले
दिल पे मेरे
तुलसी तले
क्यों जलें नहीं अब
दीप घरों में
रोक लेते हैं
उदासियों की धूप
यादों के पर्दे
क्षितिज पार
ये अद्भुत मिलन
धरा रवि का
ढहा देती हैं
हकीकती आंधियां
ख्वाबों के किले
सांझ सलोनी
लगा मांग सिन्दूर
सजाये ख्वाब
किसी को खुशी
और गम किसी को
वर्षा ने दिये
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