Tuesday, 5 July 2016


साँसों की तार
दिखाए करतब
ज़िंदगी नटी

काट डालेगा
दरख्तों के संग तू
साँसों की डोर

कागजी नाव
बरसात का पानी
बच्चे मल्लाह



अंकुर उगा
पा धरती का प्यार
दरख़्त बना


झुर्री में दबी
पर फींकी न पड़ी
माँ की मुस्कान


रिश्तों की रेत
पाके प्यार की नमी
चिपकी रहे

रोज़ बदलें
हो गए आजकल
लिबास रिश्ते

हाथ उठाए
बेटा जब माँ पर
दूध लजाए

खुशी की बाढ़
बरसाती पानी में
कागजी नाव


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