साँसों की तार
दिखाए करतब
ज़िंदगी नटी
काट डालेगा
दरख्तों के संग तू
साँसों की डोर
कागजी नाव
बरसात का पानी
बच्चे मल्लाह
अंकुर उगा
पा धरती का प्यार
दरख़्त बना
झुर्री में दबी
पर फींकी न पड़ी
माँ की मुस्कान
रिश्तों की रेत
पाके प्यार की नमी
चिपकी रहे
रोज़ बदलें
हो गए आजकल
लिबास रिश्ते
हाथ उठाए
बेटा जब माँ पर
दूध लजाए
खुशी की बाढ़
बरसाती पानी में
कागजी नाव
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