Sunday, 17 July 2016

                    गर्मी
गर्मी इतनी
नदियों को भी हुयी
पानी की कमी

उमस गर्मी
दोनों सगी बहनें
ले लेती जान

पसीने संग
टपक रहा दम
गर्मी भीषण

गर्मी बहुत
गुलाम हुए हम
बत्ती के देखो

धूप का खौफ
हुये पेड़ भी तंग
ढूंढें वो छांव  

बिन बारिश
जलती दोपहर
मन उदास

धरती त्रस्त
पशु पंछी मानव
ढूंढते जल

काला हो गया
जल कर धूप में
कागा बेचारा

कर जाता है
कोलतारी बदन

जेठ महीना

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