Sunday, 17 July 2016

बादल


जुल्फें झटकें
फुहार बरसाएं
देखो घटाएं

बादल आओ
सूर्य बहुत  गर्म
पर्दा लगाओ

चली बदरी
संग बादल दूल्हे
नैना बरसे

बारिश आई
छाता कुनमुनाया
क्यों नींद तोडी

ज्यों ही बादल
बिजली चमकाए
घटा बरसे

जंगली मेघ
पहाडो पर  उगे
बरसे नहीं

बादल गरजा
डर गई बारिश
फिर ना बरसी

सावन भादो

मर गया प्यासा
मेघा बरसो

सूखा ही सूखा
मेघ है परेशान
बरसूँ कंहा

झोली फैलाये 
खड़ी हुयी धरती
बरसो मेघ


नदी नालों को
बांटती है जवानी 
ये बरसात 


आसमान में
  
ऐसे दिखते मेघ
बहा हों  दूध

बिन बारिश
घर की छत पर
चिडिया प्यासी

धूप उतरी
सूख गयी नदियाँ
बरसो मेघ

उठो बादल
बिजलियाँ कड़के
बरस जाओ

सुर सजाती
फुहारें बारिश की
झूमते वृक्ष

दूध बहा हों
बादल दिखें ऐसे
आसमान में


कुंए मुंडेर 
प्यासा बैठा है पंछी 
बरसो मेघ 

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