प्रेम करता
पर जताता नहीं
पिता है वोह
सर्द मौसम
सोता मैं सकून से
धूप की गोद
बिन मुखाग्नि
चिंताएं जला रही
इंसानी चिता
टांकती भोर
दूब के गलीचे पे
ओस के मोती
कटे दरख़्त
टूट कर बिखरे
नंगे पहाड़
संभाल रखे
डायरी गुल्लक में
गीतों के सिक्के
पर जताता नहीं
पिता है वोह
सर्द मौसम
सोता मैं सकून से
धूप की गोद
बिन मुखाग्नि
चिंताएं जला रही
इंसानी चिता
टांकती भोर
दूब के गलीचे पे
ओस के मोती
कटे दरख़्त
टूट कर बिखरे
नंगे पहाड़
संभाल रखे
डायरी गुल्लक में
गीतों के सिक्के