Friday, 22 July 2016
Sunday, 17 July 2016
इन्द्रधनुष
1
संग बरखा
इन्द्रधनुषी पुल
बनाये धूप
2
रंगे आकाश
इन्द्रधनुषी रंग
बरखा धूप
इन्द्रधनुषी रंग
बरखा धूप
3
बनाया चित्र
बादलों ने धूप संग
इन्द्रधनुषी
4
बिखेरे छटा
धूप वर्षा के बाद
इन्द्रधनुषी
5
लिखे पैगाम
बादल पे धूप ने
इन्द्रधनुषी
6
गोरी की काया
रंग गया फागुन
इन्द्रधनुषी
7
प्रेम की पीर
जगाती है जज्बात
इन्द्रधनुषी
8
रवि किरनें
उतरती सीड़ियां
इन्द्रधनुषी
उतरती सीड़ियां
इन्द्रधनुषी
9जिंदगी तेरी
छोटी सी है जी इसे
इन्द्रधनुषी
छोटी सी है जी इसे
इन्द्रधनुषी
10
रोज उमडें
ख्वाब इंद्रधनुषी
नींद में मेरी
गर्मी
गर्मी इतनी
नदियों को भी हुयी
पानी की कमी
उमस गर्मी
दोनों सगी बहनें
ले लेती जान
पसीने संग
टपक रहा दम
गर्मी भीषण
गर्मी बहुत
गुलाम हुए हम
बत्ती के देखो
धूप का खौफ
हुये पेड़ भी तंग
ढूंढें वो छांव
बिन बारिश
जलती दोपहर
मन उदास
जलती दोपहर
मन उदास
धरती त्रस्त
पशु पंछी मानव
ढूंढते जल
काला हो गया
जल कर धूप में
कागा बेचारा
कर जाता है
कोलतारी बदन
जेठ महीना
बादल
जुल्फें झटकें
फुहार बरसाएं
देखो घटाएं
बादल आओ
सूर्य बहुत गर्म
पर्दा लगाओ
चली बदरी
संग बादल दूल्हे
नैना बरसे
बारिश आई
छाता कुनमुनाया
क्यों नींद तोडी
ज्यों ही बादल
बिजली चमकाए
घटा बरसे
जंगली मेघ
पहाडो पर उगे
बरसे नहीं
बादल
गरजा
डर
गई बारिश
फिर
ना बरसी
|
सावन भादो
|
मर गया प्यासा
मेघा बरसो
सूखा ही सूखा
मेघ है परेशान
बरसूँ कंहा
झोली फैलाये
खड़ी हुयी धरती
बरसो मेघ
बरसो मेघ
|
|
नदी नालों को
बांटती है जवानी
ये बरसात
ये बरसात
आसमान में
|
|
ऐसे दिखते मेघ
बहा हों दूध
बिन बारिश
घर की छत पर
चिडिया प्यासी
घर की छत पर
चिडिया प्यासी
धूप उतरी
सूख गयी नदियाँ
बरसो मेघ
सूख गयी नदियाँ
बरसो मेघ
उठो बादल
बिजलियाँ कड़के
बरस जाओ
सुर सजाती
फुहारें बारिश की
झूमते वृक्ष
दूध बहा हों
बादल दिखें ऐसे
आसमान में
कुंए मुंडेर
प्यासा बैठा है पंछी
बरसो मेघ
प्यासा बैठा है पंछी
बरसो मेघ
Wednesday, 6 July 2016
Tuesday, 5 July 2016
साँसों की तार
दिखाए करतब
ज़िंदगी नटी
काट डालेगा
दरख्तों के संग तू
साँसों की डोर
कागजी नाव
बरसात का पानी
बच्चे मल्लाह
अंकुर उगा
पा धरती का प्यार
दरख़्त बना
झुर्री में दबी
पर फींकी न पड़ी
माँ की मुस्कान
रिश्तों की रेत
पाके प्यार की नमी
चिपकी रहे
रोज़ बदलें
हो गए आजकल
लिबास रिश्ते
हाथ उठाए
बेटा जब माँ पर
दूध लजाए
खुशी की बाढ़
बरसाती पानी में
कागजी नाव
Monday, 4 July 2016
Sunday, 3 July 2016
यादें
यादों के टीले
उठाते बबंडर
बड़े हठीले
मन में उठे
यादों का बबंडर
रोंदते जाए
2
रहने ना दे
यादों के बबंडर
चैन से मुझे
3
यादों के रेले
बबंडर उडाये
जान ले जाए
4
बिखरे मोती
सुनहरी यादो के
आँखों के रस्ते
5
रिस्ते है जख्म
सुनहरी यादो के
बरसातों मे
6
सोने ना देते
ख्वाब यादो के मुझे
ठंडी रातों मे
7
यादों को लिए
जले आँसू का तेल
पलकों तले
8
बंद हैं आंखे
पर नींद न आए
याद सताये
9
धुंधला विष
तेरी यादों का फैला
जीना दूभर
10
सजा है ये दी
तेरी यादों ने मुझे
जीऊँ न मरूँ
यादों के टीले
उठाते बबंडर
बड़े हठीले
मन में उठे
यादों का बबंडर
रोंदते जाए
2
रहने ना दे
यादों के बबंडर
चैन से मुझे
3
यादों के रेले
बबंडर उडाये
जान ले जाए
4
बिखरे मोती
सुनहरी यादो के
आँखों के रस्ते
5
रिस्ते है जख्म
सुनहरी यादो के
बरसातों मे
6
सोने ना देते
ख्वाब यादो के मुझे
ठंडी रातों मे
7
यादों को लिए
जले आँसू का तेल
पलकों तले
8
बंद हैं आंखे
पर नींद न आए
याद सताये
9
धुंधला विष
तेरी यादों का फैला
जीना दूभर
10
सजा है ये दी
तेरी यादों ने मुझे
जीऊँ न मरूँ
वर्षा दुल्हन
बैठी मेघ पालकी
हवा कहार
बूँद की आस
आयी मेघ पालकी
करे निराश
होठों का स्पर्श
वो तेरा एहसास
बढ़ाता प्यास
तेरा वो स्पर्श
डाल गया फफोले
दिल पे मेरे
तुलसी तले
क्यों जलें नहीं अब
दीप घरों में
बैठी मेघ पालकी
हवा कहार
बूँद की आस
आयी मेघ पालकी
करे निराश
होठों का स्पर्श
वो तेरा एहसास
बढ़ाता प्यास
तेरा वो स्पर्श
डाल गया फफोले
दिल पे मेरे
तुलसी तले
क्यों जलें नहीं अब
दीप घरों में
रोक लेते हैं
उदासियों की धूप
यादों के पर्दे
क्षितिज पार
ये अद्भुत मिलन
धरा रवि का
ढहा देती हैं
हकीकती आंधियां
ख्वाबों के किले
सांझ सलोनी
लगा मांग सिन्दूर
सजाये ख्वाब
किसी को खुशी
और गम किसी को
वर्षा ने दिये
वर्षा दुल्हन
बैठी मेघ पालकी
हवा कहार
बूँद की आस
आयी मेघ पालकी
करे निराश
होठों का स्पर्श
वो तेरा एहसास
बढ़ाता प्यास
तेरा वो स्पर्श
डाल गया फफोले
दिल पे मेरे
तुलसी तले
क्यों जलें नहीं अब
दीप घरों में
बैठी मेघ पालकी
हवा कहार
बूँद की आस
आयी मेघ पालकी
करे निराश
होठों का स्पर्श
वो तेरा एहसास
बढ़ाता प्यास
तेरा वो स्पर्श
डाल गया फफोले
दिल पे मेरे
तुलसी तले
क्यों जलें नहीं अब
दीप घरों में
रोक लेते हैं
उदासियों की धूप
यादों के पर्दे
क्षितिज पार
ये अद्भुत मिलन
धरा रवि का
ढहा देती हैं
हकीकती आंधियां
ख्वाबों के किले
सांझ सलोनी
लगा मांग सिन्दूर
सजाये ख्वाब
किसी को खुशी
और गम किसी को
वर्षा ने दिये
तोड़ लेता मैं
रोज़ ही प्रकृति से
एक कविता
रोज़ ही प्रकृति से
एक कविता
खड़ा पलाश
ले कर सर पर
आग का घड़ा
ले कर सर पर
आग का घड़ा
चीखे चिल्लाये
फंस कर बांसों में
आवारा हवा
फंस कर बांसों में
आवारा हवा
लूट ले गया
दरख्तो का वैभव
ये पतझड़
दरख्तो का वैभव
ये पतझड़
कोहरा आया
सुबह से सूरज
बन्दी बनाया
सुबह से सूरज
बन्दी बनाया
घरों से आई
रोटिओं की सुगंध
साँझ की बेला
रोटिओं की सुगंध
साँझ की बेला
गर्मी इतनी
नदियों को भी हुई
पानी की कमी
नदियों को भी हुई
पानी की कमी
लाया बसंत
हर वृक्ष के वास्ते
नई पौशाक
हर वृक्ष के वास्ते
नई पौशाक
बारिश पड़ी
उठा धरा घूँघट
झाँका अंकुर
उठा धरा घूँघट
झाँका अंकुर
बन के काल
आया है जंगल में
लक्कड़हारा
आया है जंगल में
लक्कड़हारा
वर्षा जो गिरी
पेड़ों पर लटकीं
बूंदों की लड़ी
पेड़ों पर लटकीं
बूंदों की लड़ी
आई शहर
गाँव की पगडण्डी
हस्ती ही खो दी
गाँव की पगडण्डी
हस्ती ही खो दी
आंधी तूफ़ान
उड़ा गरीब झुग्गी
रोये बहुत
उड़ा गरीब झुग्गी
रोये बहुत
लाँघी है सीमा
जब जब नदी ने
आया सैलाब
जब जब नदी ने
आया सैलाब
बूढा दरख़्त
चाहे फल नहीं दे
छाँव तो देगा
चाहे फल नहीं दे
छाँव तो देगा
चाँद बहाये
चाँदनी की नदिया
रात नहाये
चाँदनी की नदिया
रात नहाये
जीत के हारी
सिंधु से मिल नदी
हो गई खारी
सिंधु से मिल नदी
हो गई खारी
आया चुगने
सूरज राजहंस
ओस के मोती
सूरज राजहंस
ओस के मोती
साँसों की तार
दिखाए करतब
ज़िंदगी नटी
पेड़ जो कटा
छाया का उस दिन
आँचल फटा
समन्द्र नहीं
एक बूँद नदी की
प्यासा चाहता
शक धागों में
उलझ कर गिरा
टूटा यकीन
दिखाए करतब
ज़िंदगी नटी
पेड़ जो कटा
छाया का उस दिन
आँचल फटा
समन्द्र नहीं
एक बूँद नदी की
प्यासा चाहता
शक धागों में
उलझ कर गिरा
टूटा यकीन
रवि जुलाहा
किरणों के धागे से
बुने उजाला ।
भोर ने धोई
रजनी की कालस
फैला उजास ।
सूखा है कुआँ
पनघट उदास
है जेठ मास ।
लगते अच्छे
कड़कती धूप में
छाँव के धब्बे ।
करे आराम
चितकबरी धूप
पेड़ों के नीचे।
ढला जो दिन
धरती छोड़ उड़ी
धूप की चिडी ।
जल -समाधि
ले रहा सागर में
थका सूरज ।
लौटे परिंदे
दरख्तों की शाखाएँ
खुशी से झूमीं ।
बेचता तारे
चंद्रमा नभ पर
बिछा के रात।
व्योम की शय्या
ओढ़कर बादल
सूरज सोया ।
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