Wednesday, 9 October 2024

चितकबरी धूप
1
लोरियां गाएँ
रात संग हवाएँ
जग सुलाएँ
2
मोती सी बिछीं
कमल दल पर
ओस की बूंदें
3
काढ़ती तारे
रात के आँचल मे
चंद्र किरणें
4
झील की शैया
लगा चाँद तकिया
सोया कमल
5
ठंड ने भेजी
कोहरे की रज़ाई
धूप भगाई
6
चाँद चाँदनी
ले तारों की बारात
घूमें आकाश
7
रात बिछाए
सूरज मिटा जाये
ओस के मोती
8
वर्षा की झड़ी
सजा गई पेड़ों पे
बूंदों की लड़ी
9
दूर क्षितिज
समाये नभ धरा
एक दूजे मे
10
मिलते रोज़
क्षितिज पर दोनों
धरा सूरज
11
कोहरा आया
सुबह से सूरज
बंदी बनाया
12
है दिव्य सेतु
धरा से नभ तक
इंद्रधनुष
13
चुरा के भागी
बगिया से सुगंध
चोरनी हवा
14
फंस चीड़ मे
करे चीख पुकार
उत्पाती हवा
15
चुरा के रंग
फूलों के बदन से
उडी तितली

सिंदूर

 सूरज दूल्हा

खड़ा लिए सिंदूर

सांझ के द्वार


सजी है भोर

माथे सूरज बिंदी

मांग सिंदूर


कमल लाल

ज्यों लगा हो सिंदूर

झील के भाल


दुल्हन बनी

सजा माथे सिंदूर

मिला संसार


चली बन्दूक

बह गया सिन्दूर

बन के खून

Saturday, 12 November 2016

प्रेम करता
पर जताता नहीं
पिता है वोह

सर्द मौसम
सोता मैं सकून से
धूप की गोद

बिन मुखाग्नि
चिंताएं जला रही
इंसानी चिता


टांकती भोर
दूब के गलीचे पे
ओस के मोती

कटे दरख़्त
टूट कर बिखरे
नंगे पहाड़

संभाल रखे
डायरी गुल्लक में
गीतों के सिक्के

Monday, 1 August 2016

उम्र

वक़्त दीमक
चाटे दिन ब दिन
शाख उम्र की

खर्च हो रहे
ज़िंदगी गुल्लक से
उम्र के साल

वक़्त की आंधी
संग उड़ा ले जाती
उम्र के पत्ते

उम्र का घड़ा
बूंद बूंद रिसता
खाली हो रहा

करती वार
काटे उम्र के साल
वक़्त कटार

चुगती जाये
समय की चिड़िया
उम्र के दाने

खूब सेक ली
अब ढलने लगी
उम्र की धूप

ज़िंदगी रेल
भागे जब तक है
उम्र का तेल

सिक्के उम्र के
कब खर्च हो गए
पता ना चला

उसने दिये
गुल्लक मे सबको
गिन के सिक्के

जीवन दीप
धडकनों का तेल
साँसों की बाती

कब फूटेगा
बुलबुला प्राणो का
कौन जानता

उम्र दरख़्त
गिरता एक पत्ता
हरेक साल
रिश्ते

घायल पड़ा
शब्दों के बाणों पर
रिश्तों का भीष्म

गिरी किताब
उठा के उसने दी
बनाए रिश्ते

ठेस ना लगे
ये रिश्तो की दीवारें
कच्ची बहुत

बहा ले जो तू
दो अश्क पछतावा
जी उठें रिश्ते

तोड़ते दम
फंसे स्वार्थ जाल में
आपसी रिश्ते

रिश्तों के धागे
संभाल न पाएंगें
झूठ का भार

डूब ही गई
मतलबी नदी मे
रिश्तों की नाव

शब्दों की चोट
बिवाई से दुखते
रिश्तों के पाँव

बुने हैं रिश्तों
ले विश्वास का ताना
प्यार का बाना

जा कर दूर
आ गया और पास
अपनों के मैं

रिश्ते रेशम
पड़े गाँठ इनमें
फिर ना खुले

तकरार से
जल जाते हैं रिश्ते
बिन आग के

कहाँ खो गया
आपस का लगाव
वो साँझा चूल्हा
उम्र

वक़्त दीमक
चाटे दिन ब दिन
शाख उम्र की

खर्च हो रहे
ज़िंदगी गुल्लक से
उम्र के साल

वक़्त की आंधी
संग उड़ा ले जाती
उम्र के पत्ते

उम्र का घड़ा
बूंद बूंद रिसता
खाली हो रहा

करती वार
 काटे उम्र के साल
वक़्त कटार

चुगती जाये
समय की चिड़िया
उम्र के दाने

खूब सेक ली
अब ढलने लगी
उम्र की धूप

ज़िंदगी रेल
भागे जब तक है
उम्र का तेल

सिक्के उम्र के
कब खर्च हो गए
पता ना चला

उसने दिये
गुल्लक मे सबको
गिन के सिक्के

जीवन दीप
धडकनों का तेल
साँसों की बाती

कब फूटेगा
बुलबुला प्राणो का
कौन जानता

उम्र दरख़्त
गिरा दे एक पत्ता
हरेक साल
बारिश और नदी

हो गई जवाँ  
पी वर्षा का अमृत
बूढी नदिया

पड़ी फुहार
भागी तोड़ बंधन
नदी की धार

मरती नदी
पी वर्षा संजीवनी
फिर जी उठी

गिरी बारिश
बन पानी के बीज
उगी नदियां