Wednesday, 9 October 2024

सिंदूर

 सूरज दूल्हा

खड़ा लिए सिंदूर

सांझ के द्वार


सजी है भोर

माथे सूरज बिंदी

मांग सिंदूर


कमल लाल

ज्यों लगा हो सिंदूर

झील के भाल


दुल्हन बनी

सजा माथे सिंदूर

मिला संसार


चली बन्दूक

बह गया सिन्दूर

बन के खून

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