रिश्ते
घायल पड़ा
शब्दों के बाणों पर
रिश्तों का भीष्म
शब्दों के बाणों पर
रिश्तों का भीष्म
गिरी किताब
उठा के उसने दी
बनाए रिश्ते
उठा के उसने दी
बनाए रिश्ते
ठेस ना लगे
ये रिश्तो की दीवारें
कच्ची बहुत
ये रिश्तो की दीवारें
कच्ची बहुत
बहा ले जो तू
दो अश्क पछतावा
जी उठें रिश्ते
दो अश्क पछतावा
जी उठें रिश्ते
तोड़ते दम
फंसे स्वार्थ जाल में
आपसी रिश्ते
फंसे स्वार्थ जाल में
आपसी रिश्ते
रिश्तों के धागे
संभाल न पाएंगें
झूठ का भार
संभाल न पाएंगें
झूठ का भार
डूब ही गई
मतलबी नदी मे
रिश्तों की नाव
मतलबी नदी मे
रिश्तों की नाव
शब्दों की चोट
बिवाई से दुखते
रिश्तों के पाँव
बिवाई से दुखते
रिश्तों के पाँव
बुने हैं रिश्तों
ले विश्वास का ताना
प्यार का बाना
ले विश्वास का ताना
प्यार का बाना
जा कर दूर
आ गया और पास
अपनों के मैं
आ गया और पास
अपनों के मैं
रिश्ते रेशम
पड़े गाँठ इनमें
फिर ना खुले
पड़े गाँठ इनमें
फिर ना खुले
तकरार से
जल जाते हैं रिश्ते
बिन आग के
जल जाते हैं रिश्ते
बिन आग के
कहाँ खो गया
आपस का लगाव
वो साँझा चूल्हा
आपस का लगाव
वो साँझा चूल्हा
No comments:
Post a Comment