Monday, 1 August 2016

खुदगर्ज़

रखा गर्भ मे
सींचा खुद खून से
सहे हैं कष्ट

जन्म फिर दे
क्या क्या न सहा
पाला है तुझे

सीने से लगा
जगती रात भर
फिर भी खुश

खुद ना खाये
पीलाती रहे दूध
पेट भरके

हाथ पकड़
चलना है सिखाया
आगे बढ़ाया

अच्छे से अच्छा
तुझ को है खिलाया
खुद न खाया

अच्छे संस्कार
दिये तुझ को सारे
जीना सिखाया

खुदगर्ज़ तू
दो वक़्त की रोटी भी
खिला ना पाया

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