क्षितिज पार
अंबर धरा मिले
जन्मा सूरज
व्योम विशाल
मुट्ठी भर लेकिन
मुझे ना मिला
रोया आकाश
आज उसका चाँद
है मेरे साथ
नभ ओढ़ता
बादलों का दोशाला
जगी है आस
बादलों का दोशाला
जगी है आस
तारों के सिक्के
चंद्रमा ने उँड़ेले
नभ चादर
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