बारिश और नदी
हो गई जवाँ
पी वर्षा का अमृत
बूढी नदिया
पड़ी फुहार
भागी तोड़ बंधन
नदी की धार
मरती नदी
पी वर्षा संजीवनी
फिर जी उठी
गिरी बारिश
बन पानी के बीज
उगी नदियां
हो गई जवाँ
पी वर्षा का अमृत
बूढी नदिया
पड़ी फुहार
भागी तोड़ बंधन
नदी की धार
मरती नदी
पी वर्षा संजीवनी
फिर जी उठी
गिरी बारिश
बन पानी के बीज
उगी नदियां
Umda
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