Monday, 1 August 2016

बारिश और नदी

हो गई जवाँ  
पी वर्षा का अमृत
बूढी नदिया

पड़ी फुहार
भागी तोड़ बंधन
नदी की धार

मरती नदी
पी वर्षा संजीवनी
फिर जी उठी

गिरी बारिश
बन पानी के बीज
उगी नदियां

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